कुलत्तूप्पुषा जॉय राइड ...!
अर्सों बाद 'पुनलूर' शहर में आ पहुंचा हूँ। सोचा के, क्यों नहीं 'कुलत्तूप्पुषा 'के अय्यप्पा मंदिर दर्शन कर आऊँ। इस विख्यात मंदिर दर्शन का अनुभव आज तक नहीं हो पाया था ।फिर मैंने बिलकुल देर नहीं लगाया। सामने दिखीं, राज्य परिवहन के बस में जा बैठा। गाडी चल पड़ी। मेरा सामनेवाला सीट खाली पड़ा था। देखते ही देखते, मेरे गाड़ीके एम.आर.ऍफ़. पहियें , दोनों तरफ इतालियन टाइल्स लगे 'करवालूर'
के स्टॉप पर जा रुकी। बाजू के खाली सीट पर मुंड-माला धारी ( मुंडू -धोती को कहते हैं )एक स्थानीय सज्जन आकर बैठ गया। मेरे तरफ कुछ क्षणोंके सूक्ष्मावलोकनके
पश्चात, ,श्रीमानने बहुत ही आधिकारिक ढंग से मुझसे वार्तालाप आरम्भ किया। कहाँ? आया कहाँ से ? रोजी -रोटी के साधन ?इत्यादि सवालोंसे उसने, मेरी सारी जन्मकुंडली तक जानने का प्रयास किया। पर दम्भसे भरे उन सवालोंका, मेरे प्रत्युत्तरोंसे वह तृप्तिमंद नहीं लग रहा था। अब कुछ क्षणों केलिए जब महाशय चुप हुआ, तो मैंने अतिविनीत भावसे उनसे उनकी नाम पूछ डाला । कुछ देर उसने मेरे चेहरे पर अपनी निगाहें टिकाये रखा ,फिर असमंजस भरे अंदाज़ में कहा कि ,उसका नाम 'जॉय ' हैं। लेकिन दोस्तों मुझे , उसके चेहरे पर अपने नाम बताते हुए कोई ' जॉय ' दर्शा ही नहीं तब। मेरा अगला सवाल उनसे यह था के, गाडी के कुलत्तूप्पुषा पहुँचने में कितने समय लगेंगे ? . इस समय उत्तर बहुत जल्द मिला " यही कहीं ..डेढ़ घंटे"। जवाब के साथ -साथ, मुझे उसके यह प्रतिसवाल भी सुनाई पड़ा " वहां क्या करने जा रहे हो ...? क्या कोई परिचित से मिलने ...? पर्यटक अय्यप्पा-स्वामी भेष-भूषाधारी मुझको, उसके यह उटपटांग सवाल चकित ही कर दिया। फिर सँभालते हुए जवाब दिया "मंदिर जा रहा हूँ ...भाई.। अब आश्चर्यचकित 'जॉय' ने मुझसे पुछा:- " मंदिर ...? कौनसी मंदिर....?किसकी मंदिर.... ? . यह सवाल सुनते ही ,उससे वार्तालाप जारी रखने का मेरी 'जॉय ' समाप्त हो गया ।एकाएक मेरी वाचालता मौन रूपधारण कर लिया । फिर गाडी 'अंचल 'नामक जगह रुक गयी, और अपने उतरे चेहरे लिए, 'जॉय' गाडीसे उत्तर कर, नीचे भीड़ में समा गया।
उस समय अचानक मेरी दॄष्टी अपने सीट के ऊपर,दीवार पर खींचे गए लिखावट पर पड़ी - " विकलांग ". अब मैंने मन ही मन यह सोचने लगा " आखिर इस समाज में हिजड़ोंको, विकलांग के दर्जा क्यों नहीं ? क्योंकि कुलत्तूप्पुषा, जो केरल के एक विख्यात महामंदिर हैं, जहाँ प्रतिदिन हज़ारों भक्त दर्शन हेतु पहूँच जाते हैं, अन्य प्राँतोंसे भी , उस मंदिर से, प्राय दस मील दूर रहता स्थानीय व्यक्ति ' जॉय ' , उक्त मंदिर से बिलकुल अपरिचित एवं नावाकिफ़ था। क्या आया भाईयों कुछ समझ ....?
The Lord Ayyappa Temple at Kulathupuzha near Thenmala in Kollam District of Kerala is an important shrine visited by Ayyappa devotees ..
http://kurup-man.podomatic.com/entry/2015-01-1
दो :-भनिति मोरी सबगुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।
सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिबेक।
कबि न होऊँ नहीं बचन प्रबीनु।
सकल कला सब बिद्या हीनु।।
अखर अरध अलंकृति नाना।
छंद प्रबंध अनेक बिधाना।।
भाव भेद रस भेद अपारा।
कबिद दोष गुन बिबिध प्रकारा।।
कबिद बिबेक एक नहिं मोरें।।
सत्य कहउँ लिखि कागद कोरें।।
छमिहहि वो सज्जन मोरि ढिठाई।
सुनिहहिं बालबचन मन लाई।।
जौ बालक कह तोतरी बाता।
सुनहि मुदित मन पितु अरु माता।।
हसिहहिं कूर कुटिल कुबिचारी।
जे परदूषन भूषनधारी।।
खल परिहास होई हित मोरा।
काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।
भाषा भनिति भोरि मति मोरी।
हसिबे जोग हसे नहिं खोरी।।
गुन अवगुन जानत सब कोई।
जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।
प्रभु पद प्रीति न समुझि नीकी।
तिन्हहि सुनि लागिहि फीकी।।
0 Comments:
Post a Comment
Note: Only a member of this blog may post a comment.
<< Home