Wednesday, February 24, 2016

Never Judge Anyone By Appearance...2

Tuesday, February 23, 2016

गौ माता की महिमा ...

1. ज्योतिष में गोधू‍लि का समय विवाह के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
2. यदि यात्रा के प्रारंभ में गाय सामने पड़ जाए अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने पड़ जाए तो यात्रा सफल होती है।
3. जिस घर में गाय होती है, उसमें वास्तुदोष स्वत: ही समाप्त हो जाता है।
4. जन्मपत्री में यदि शुक्र अपनी नीच राशि कन्या पर हो, शुक्र की दशा चल रही हो या शुक्र अशुभ भाव (6, 8, 12)- में स्‍थित हो तो प्रात:काल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की गाय को खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र संबंधी कुदोष स्वत: समाप्त हो जाता है।
5. पितृदोष से मुक्ति- सूर्य, चंद्र, मंगल या शुक्र की युति राहु से हो तो पितृदोष होता है। यह भी मान्यता है कि सूर्य का संबंध पिता से एवं मंगल का संबंध रक्त से होने के कारण सूर्य यदि शनि, राहु या केतु के साथ स्थित हो या दृष्टि संबंध हो तथा मंगल की यु‍ति राहु या केतु से हो तो पितृदोष होता है। इस दोष से जीवन संघर्षमय बन जाता है। यदि पितृदोष हो तो गाय को प्रतिदिन या अमावस्या को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाने से पितृदोष समाप्त हो जाता है।
6. किसी की जन्मपत्री में सूर्य नीच राशि तुला पर हो या अशुभ स्‍थिति में हो अथवा केतु के द्वारा परेशानियां आ रही हों तो गाय में सूर्य-केतु नाड़ी में होने के फलस्वरूप गाय की पूजा करनी चाहिए, दोष समाप्त होंगे।
7. यदि रास्ते में जाते समय गोमाता आती हुई दिखाई दें तो उन्हें अपने दाहिने से जाने देना चाहिए, यात्रा सफल होगी।
8. यदि बुरे स्वप्न दिखाई दें तो मनुष्य गोमाता का नाम ले, बुरे स्वप्न दिखने बंद हो जाएंगे।
9. गाय के घी का एक नाम आयु भी है- 'आयुर्वै घृतम्'। अत: गाय के दूध-घी से व्यक्ति दीर्घायु होता है। हस्तरेखा में आयुरेखा टूटी हुई हो तो गाय का घी काम में लें तथा गाय की पूजा करें।
10. देशी गाय की पीठ पर जो ककुद् (कूबड़) होता है, वह 'बृहस्पति' है। अत: जन्म पत्रिका में यदि बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर में हों या अशुभ स्थिति में हों तो देशी गाय के इस बृहस्पति भाग एवं शिवलिंगरूपी ककुद् के दर्शन करने चाहिए। गुड़ तथा चने की दाल रखकर गाय को रोटी भी दें।
11. गोमाता के नेत्रों में प्रकाश स्वरूप भगवान सूर्य तथा ज्योत्स्ना के अधिष्ठाता चन्द्रदेव का निवास होता है। जन्मपत्री में सूर्य-चन्द्र कमजोर हो तो गोनेत्र के दर्शन करें, लाभ होगा
What do Kerala astrologers do ?





Source: Gau Mataji by ManojKurup on Rumble

Be sure to taste all of your words before you spit them out...!


Monday, February 22, 2016

Dogs never bite me. Just humans.

Thorns may hurt you, men desert you, sunlight turn to fog;
but you’re never friendless ever, if you have a dog.



Source: Capuchin monkey loves to play basketball by Shelda7 on Rumble

Wednesday, February 17, 2016

अब तो इस मन के मंदिर में प्रभु का हुआ हैं बसेरा।

Tuesday, February 16, 2016

Be fearless


Sunday, February 14, 2016

ईश्वर सर्वत्र हैं।


हरिद्वार से गंगाजल लेकर उससे रामेश्वर में भगवान शंकर का अभिषेक करने का प्राचीन समय से ही  बड़ा महत्त्व रहा हैं ।   महाराष्ट्र के प्रसिद्द संत एकनाथ जी अपने कुछ शिष्यों व संतों  साथ गंगाजल लेकर पैदल-पैदल रामेश्वर जा  थे । नगर , ग्राम ,जंगल ,पर्वत रेगिस्तान आदि पार करते हुए वे चले जा रहे थे। रेगिस्तान में एक संकट उपस्थित हो गया । सब यात्रियों ने देखा कि  मार्ग में ,एक गधा बुरी तरह धरती पर लोटपोट हो  रहा था।  उसे देखते ही सब समझ गए कि यह प्यास से तड़प रहा हैं।  यदि उसे जल नहीं मिला , तो वह कुछ देर में मर जाएगा। पर यात्रियों  के पास  तो पानी के नाम पर केवल गंगाजल था। इसलिए सब उसे सहानुभूति से देखते रहे , पर एकनाथ जी ने अपनी काँबड़ उतारी और  कलश में रखा गंगाजल गधे को पिला दिया।  गधे ने तृप्ति से उसकी ओर देखा और अपनी राह चला गया। सबने एकनाथ जी को टोका - यह आपने क्या किया ?; इतने कष्ट एवं परिश्रम से आप जो गंगाजल लाये थे , वह आपने गधे को पिला दिया ? अब भगवान को क्या चढ़ायेंगे ?एकनाथ जी ने कहा :- भगवन सर्वत्र हैं।  रामेश्वर के शिवलिंग में जो भगवान हैं , वही  इस  गधे  के अंतकरण में भी हैं।  यदि  हम जल  होते हुए भी इस मूक प्राणी को प्यासा मरने देते , तो भगवान भोलेशंकर हमें कभी क्षमा नहीं करेंगे। उनके साथ चल रहे अन्य संत तथा शिष्य एकनाथ जी के ह्रदय की विशालता देखकर दंग रह गये।
 रामेश्वरम के रामसेतु
The 18-mile bridge is said to have been passable by foot until the 1400s. Image courtesy NASA

Only animals were not expelled from Paradise.





केचिद्विवा तथा रात्रौ प्रनिन्स्तुल्यद्रुष्टयः। .ज्ञानिनो मनुजाः सत्यं किं तु ते न हि केवलम्। । .यतो हि ज्ञानिनः सर्वे पशुपक्षिमृगादयः। .ज्ञानं च तन्मनुष्याणां यत्तेषां मृगपक्षिणां। ।मनुष्याणां च यत्तेषां तुल्यमन्यत्तथोभयोः। ।
कुछ  प्राणि दिन में नहीं देखते  दुसरे रात में नहीं देखते तथा कुछ ऍसे  प्राणि हैं जो दिन और रात में बराबर देखते हैं। यह तो ठीक हैं मनुष्य समझदार होते हैं ; किंतु केवल वे ही नहीं होते।  पशु ,पक्षी और मृग आदि सभी प्राणि समझदार होते हैं।  मनुष्योंके समझ भी वैसी ही होती हैं , जैसी उन मृग और पक्षी आदि की होते हैं. तथा जैसी मनुष्यों की होती हैं ,वैसी  मृग-पक्षी आदि की होती हैं। देवी भागवत अध्यायम -१ (४८ ,४९ ,५० )

Saturday, February 13, 2016

भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार

Friday, February 5, 2016

The Wise Monkeys..!



SlideTalk Video: No Evil Monkeys...